• अगर आपने ये तेल नहीं छोड़ा तो हार्ट अटैक के लिए तैयार रहे, आज ही घर से बाहर फेंक दें

    वागभट्ट जी कहते हैं कि जब विशेषग्य चिकित्सा की बात आए गंभीर रोग जैसे डाईबीटीज है, कैंसर है, अर्थराइट्स है, तो इसमें वो कहते हैं कि भगवान ने प्रकृति में ऐसी व्यवस्था बनाई है कि विशेष और गंभीर रोगों कि चिकित्सा भी आप सहजता से आसानी से कर सकें

    वागभट्ट जी कहते हैं कि जब विशेषग्य चिकित्सा की बात आए गंभीर रोग जैसे डाईबीटीज है, कैंसर है, अर्थराइट्स है, तो इसमें वो कहते हैं कि भगवान ने प्रकृति में ऐसी व्यवस्था बनाई है कि विशेष और गंभीर रोगों कि चिकित्सा भी आप सहजता से आसानी से कर सकें इसमें से उन्होंने एक जगह लिखा है कि इस पुरे ब्रह्माण्ड में पूरी प्रकृति में ऐसी कई चीजें है जो एक साथ वात, पित्त, और कफ तीनों को एक साथ ठीक रखने की शक्ति रखती है ये चीजें बहुत ही कम हैं लेकिन हैं ज्यादातर कुछ चीजें ऐसी हैं कि सिर्फ वात को अच्छा रखेंगी कुछ कफ को और कुछ पित्त को अच्छा रखेंगी ऐसे ही वात को ठीक रखने वाली एक चीज हमारे घर में है शुद्ध तेल, वो तेल जिसमें हम सब्जियां बनाते हैं तो तेल हमारे शरीर में वात को सम रखता हैं यानि जितना चाहिए उतना ही रखता है बढ़ने नही देता हड्डियां में दर्द, कमर दुखना, घुटने दुखना और सबसे खतरनाक रोग हार्ट अटैक ये सभी वात के ही रोग हैं और खतरनाक रोग हैं परालेसिस, ब्रेन का डैमेज हो जाना तो ये सभी रोग वात ख़त्म हो जाने या बिगड़ने की वजह से होते हैं लेकिन वागभट्ट जी ने कहा है कि तेल का मतलब शुद्ध तेल, अब ये शुद्द तेल क्या है शुद्ध तेल माने काछी घानी से निकला हुवा तेल, बिना मिलावट का मशीन से निकला हुवा सीधा तेल, मतलब कि नॉन रिफाइंड तेल, अगर आप तेल खा रहे हैं तो वागभट्ट जी का निवेदन है कि आप तेल शुद्द खाईये मतलब रेफाइंड तेल मत खाइए डबल रेफाइंड तेल मत खाइए क्यों न खाएं रेफाइंड तेल किसी भी तेल को रिफाइंड होने में 6 से 7 केमिकल इस्तेमाल होते है और डबल रेफिंद में 12 से 13 केमिकल इस्तेमाल होते हैं वो सभी केमिकल मनुष्य द्वारा तैयार किये हुए हैं भगवान द्वारा बनाये गये एक भी केमिकल यानि प्रकृति द्वारा दिए गये आर्गेनिक केमिकल तेल को रेफफाइंड नही कर सकता जितने भी केमिकल तेल को साफ़ करने में इस्तेमाल होते हैं वो सभी इनोर्गानिक केमिकल हैं और इनोर्गानिक केमिकल ही दुनिया में जहर बनाते हैं और उनका कॉम्बिनेशन ही जहर कि तरफ लेकर जाता है आज कि दुनिया में मॉडर्निजम यानि आधुनिकता के नम पर जितने भी इनोर्गानिक केमिकल जगह जगह यूज हो रहे हैं वहां वहां ये आपको उस तरफ ले जा रहे हैं जहाँ आप जहर अपने ही शरीर में पैदा करते हैं इसलिए रिफाइंड तेल या डबल रिफाइंड तेल मत खाइए. वागभट्ट जी कहते हैं कि जिंदगी भर अगर आपको वात को ठीक रखना चाहते हैं तो वात को ठीक रखने का सबसे सरल तरीका वो बोलते हैं कि वो तेल ही है वो कहते हैं कि शुद्द तेल खाइए माने काछी घानी से निकला हुवा तेल. तो आपके मन में तुरंत दो प्रश्न आयेंगे कि शुद्ध तेल में तो बांस बहुत आती है और दूसरा कि शुद्ध तेल तो बहुत चिपचिपा और गाढ़ा होता है वैज्ञानिकों द्वारा जब तेल पर रिसर्च किया गया तो उन्होंने पाया कि चिपचिपापन तेल का प्रमुख घटक है जैसे मिटटी में माइक्रोन्यूट्रीयंट्स होते हैं जैसे कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम होते है ऐसे तेल में भी है तो तेल का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है वो उसका चिपचिपापन ही है और जैसे ही तेल में से ये चिपचिपापन निकाला तो पता चला वो तेल ही नही बचा तेल जिस चीज के लिए खाया जाता है वो बचा ही नही और पाया कि जो तेल में से बांस आ रही है वो उसमें प्रोटीन की वजह से है क्योंकि तेल में प्रोटीन बहुत होता है दालों के बाद सबसे ज्यादा प्रोटीन तेल में ही है जब तेल कि बांस ख़त्म कर दी जाये तो समझ लेना कि उसका प्रोटीन घटक निकल दिया गया अब बांस निकल दी तो प्रोटीन गयब और चिपचिपापन निकल दिया जाये तो फैटी एसिड गायब जब उसकी दोनों ही चीजें निकल गयी तो अब वो तेल नही रहा वो अब पानी है तो वागभट्ट जी कहते हैं कि वात की अगर चिकित्सा करनी है तो ध्यान रहे की आप शुद्ध तेल ही खाएं क्योंकि दुनिया में सबसे ज्यादा रोग वात के ही हैं शुद्ध तेल पे किया गया परीक्षण शुद्ध तेल का इफ़ेक्ट(फायदा) देखने के लिए कुछ लोगों पर एक्सपेरिमेंट किया गया जिन लोगों को बहुत सी समस्याएं हैं कोलेस्ट्रोल की, ट्राईग्लिसराइड की, बी.पी. की, उन लोगों को छत्तीसगढ़ में इकठा किया गया उन लोगों को कहा गया कि तुम डॉक्टर के पास जाना छोड़ दो और वागभट्ट की चिकित्सा करो छत्तीसगढ़ भारत में एकमात्र ऐसा राज्य है जहाँ शुद्ध तेल आज भी मिलता है गाँव गाँव में तेल निकालने वाली घानियाँ आज भी हैं सरसों आसानी से उपलब्ध है यही प्रयोजन था की उनका इलाज वहां किया गया तीन साढ़े तीन साल तक यही परीक्षण किया गया जिन जिन लोगों का रिफाइंड तेल बंद करवा के शुद्ध तेल पे लाया गया तो अब जब उनको डॉक्टर्स को उनकी पुरानी और नयी रिपोर्ट दिखाते हैं तो उनकी पुराणी रिपोर्ट देखके डॉक्टर्स बोलते हैं कि पुराणी रिपोर्ट के मुताबिक तो इन रोगियों 8 दिनों सी ज्यादा जीवित नही रहना चाहिए था हार्ट अटैक आना ही चाहिए था और मरना ही चाहिए था तो आप बचे कैसे हैं. और जब आज कि रिपोर्ट वो देखते हैं तो कहते हैं कि ये बस जादू ही हो सकता है तो राजीव जी बताते है कि उन्होंने सिर्फ शुद्द तेल खाया और जो तेल के घटक होते हैं वो उनको भरपूर मात्र में मिले इसलिए उनके ट्राईग्लिसराइड कम हुए, कोलेस्ट्रोल लेवल यानि VLDL , LDL कोलेस्ट्रोल लेवल कम हुए, HDL उनका बहुत तेजी से बड़ा जो कि बढ़ना ही चाहिए BP उनका अपने आप कम हुवा, और सबसे जरुरी बात हार्ट अटैक आने की जो कंडीशन बनी हुयी थी पूरी तरह से ख़त्म हुयी और दो ऐसे रोगी जिनके हार्ट में भयंकर ब्लॉकेज थी तो वो ब्लॉकेज भी नही है आज से 20-25 साल पहले हमारे घरों में बहुत सी चीजों में तेल का उपयोग होता था तो उस समय किसी को हार्ट अटैक नही होता था कारण ये था कि उस समय रिफाइंड तेल नही होता था पुराने बड़े बूढ़े बताते हैं कि हार्ट अटैक के बारे में कभी सुना ही नही था और इस रिफाइंड तेल की वजह से 17 साल के बच्चे हार्ट की बाईपास सर्जरी करवा रहे हैं ये तो बहुत दुःख की बात है कैसे मिलेगा शुद्ध सरसों का तेल जिदगी भर अगर आप वात के रोगों से बचना चाहते है तो तेल शुद्ध खाइए और दुनिया में कोई ऐसी चीज नही है जो मिलती नही अर्थशास्त्र यह कहता है कि आप डिमांड खड़ी करो सब कुछ मिलता ही अगर आप सभी संकल्प करें कि कल से सिर्फ शुद्ध तेल ही खायेंगे तो कल से ही मार्किट में शुद्ध तेल बिकने लगेगा और अब तेल की घानी लगाना बहुत आसन हो गया है 20-25 हजार की छोटी मशीन में सब तरह का तेल निकल सकता है एक बार फिर से बता दें कि जिस तेल में चिपचिपापन सबसे ज्यादा होगा और जिसमें से सबसे तेज स्मेल आती हो वो तेल ही शुद्ध होता है बाकि सब कार्बन है अगर थोडा सा तेल मुँह पे लगाने से आपकी आँख से आंशु न निकलें तो समझ लेना की वो तेल नकली है माने शुद्ध तेल को लगाने से आंशु निकलने चाहिए तो ध्यान रहे कि वात के रोगों से अगर बचना है तो शुद्ध तेल ही खाएं

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